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एक नयी शुरुआत– जरूर पढ़ें क्योंकि यह लेख आपकी जिंदगी बदल सकता हैं (Rules of Success)

जीवन (Life) में हमारे पास अपने लिए मात्र 3500 दिन (9 वर्ष व 6 महीने) ही होते है!
वर्ल्ड बैंक ने एक इन्सान की औसत आयु 78 वर्ष मानकर यह आकलन किया है जिसके अनुसार हमारे पास अपने लिए मात्र 9 वर्ष व 6 महीने ही होते है| इस आकलन के अनुसार औसतन 29 वर्ष सोने में, 3-4 वर्ष शिक्षा में, 10-12 वर्ष रोजगार में, 9-10 वर्ष मनोरंजन में, 15-18 वर्ष­ अन्य रोजमरा के कामों में जैसे खाना पीना, यात्रा, नित्य कर्म, घर के काम इत्यादि में खर्च हो जाते है| इस तरह हमारे पास अपने सपनों (Dreams) को पूरा करने व कुछ कर दिखाने के लिए मात्र 3500 दिन अथवा 84,000 घंटे ही होते है|
“संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु समय ही है”| लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोग निराशामय जिंदगी (Life) जी रहे है और वे इंतजार कर रहे होते है कि उनके जीवन में कोई चमत्कार होगा, जो उनकी निराशामय जिंदगी को बदल देगा| दोस्तों वह चमत्कार आज व अभी से शुरू होगा और उस चमत्कार को करने वाले व्यक्ति आप ही है, क्योंकि उस चमत्कार को आप के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता|
इस शुरुआत के लिए हमें अपनी सोच व मान्यताओ (beliefs) को बदलना होगा, क्योंकि
“हमारे साथ वही होता है जो हम मानते है|”
Friends, वैज्ञानिकों के अनुसार भौंरे (Bumblebee) का शरीर बहुत भारी होता है, इसलिए विज्ञान के नियमो के अनुसार वह उड़ नहीं सकता| लेकिन भौंरे को इस बात का पता नहीं होता एंव वह यह मानता है की वह उड़ सकता है इसलिए वह उड़ पाता है|
सबसे पहले हमें इस गलत धारणा (Wrong Belief) को बदलना होगा कि हमारे साथ वही होता है जो भाग्य (Bhagya) में लिखा होता है| क्योंकि ऐसा होता तो आज हम ईश्वर (God) की पूजा न कर रहे होते बल्कि उन्हें बदुआएं दे रहे होते|
हमारे साथ जो कुछ भी होता है उसके जिम्मेदार हम स्वंय होते है (We are responsible for What we are) इसलिए खुश रहना या ना रहना हम पर ही निर्भर (depend) करता है|
“भगवान उसी की मदद करते है जो अपनी मदद खुद करता है”
अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है की हमारे साथ जो कुछ भी होता है, वह हमारे हाथ में नहीं है तो वह व्यक्ति या तो इस गलत धारणा (Wrong Belief) को बदल दे या आगे इस लेख (Hindi Article) को न पढे|
जीवन के नियम :- Rules of life

हम एक नयी शुरुआत करने जा रहे है और इसके लिए हमें कुछ नियमो का पालन करना होगा| ये नियम आपकी जिंदगी बदल देंगे ( Rules That can Change Your Life in Hindi) :-
आत्मविश्वास (Self Confidence) :-

आत्मविश्वास से आशय “स्वंय पर विश्वास एंव नियंत्रण” (Believe in Yourself) से है | दोस्तों हमारे जीवन में आत्मविश्वास (Self Confidence) का होना उतना ही आवश्यक है जितना किसी फूल (Flower) में खुशबू (सुगंध) का होना, आत्मविश्वास (Self Confidence) के बगैर हमारी जिंदगी एक जिन्दा लाश के समान हो जाती है| कोई भी व्यक्ति कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो वह आत्मविश्वास के बिना कुछ नहीं कर सकता| आत्मविश्वास ही सफलता (Success) की नींव है, आत्मविश्वास की कमी के कारण व्यक्ति अपने द्वारा किये गए कार्य पर संदेह करता है| आत्मविश्वास (Self Confidence) उसी व्यक्ति के पास होता है जो स्वंय से संतुष्ट होता है एंव जिसके पास दृड़ निश्चय, मेहनत (Hardwork) व लगन (Focused), साहस (Fearless ) , वचनबद्धता (Commitment) आदि संस्कारों की सम्पति होती है|
आत्मविश्वास कैसे बढाएं:- How To Improve Self Confidence In – Hindi
स्वंय पर विश्वास रखें (Believe in Yourself), लक्ष्य बनायें (make smart goals) एंव उन्हें पूरा करने के लिए वचनबद्ध रहें| जब आप अपने द्वारा बनाये गए लक्ष्य (Goals) को पूरा करते है तो यह आपके आत्मविश्वास (Self Confidence) को कई गुना बढ़ा देता है|

खुश रहें (Be Happy), खुद को प्रेरित करें (Motivate Yourself), असफलता (Failure) से दुखी न होकर उससे सीख लें क्योंकि “experience हमेशा bad experience से ही आता है”

सकारात्मक सोचें (Think Positive) , विनम्र रहें एंव दिन की शुरुआत किसी अच्छे कार्य से करें (starting the day with a positive attitude)|

इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं है – Nothing is Impossible in this world| आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दुशमन किसी भी कार्य को करने में असफलता होने का “डर” (Fear of Failure) है एंव डर को हटाना है तो वह कार्य अवश्य करें जिसमें आपको डर लगता है| – Darr ke aage jeet hai

सच बोलें, ईमानदार रहें, धूम्रपान न करें, प्रकृति से जुड़े, अच्छे (Good) कार्य करें , जरुरतमंद की मदद करें (Be Helpful)| क्योंकि ऐसे कार्य आपको सकारात्मक शक्ति (positive power) देते हैं वही दूसरी ओर गलत कार्य एंव बुरी आदतें (Bad Habits) हमारे आत्मविश्वास को गिरा देते हैं|

वह कार्य करें जिसमें आपकी रुचि हो एंव कोशिश करें कि अपने करियर (Career) को उसी दिशा में आगे ले जिसमें आपकी रुचि हो|

वर्तमान में जियें (Live in Present) , सकारात्मक सोचें (Think Positive), अच्छे मित्र बनायें, बच्चों से दोस्तीं करें, आत्मचिंतन करें|

स्वतंत्रता (Independence):-

स्वतंत्रता का अर्थ स्वतन्त्र सोच एंव आत्मनिर्भरता से हैं|
“हमारी खुशियों का सबसे बड़ा दुश्मन निर्भरता (Dependency) ही है एंव वर्तमान में खुशियाँ कम होने का कारण निर्भरता का बढ़ना ही है”
“सबसे बड़ा यही रोग क्या कहेंगे लोग (Sabse bada rog kya kahenge log)”:- ज्यादातर लोग कोई भी कार्य करने से पहले कई बार यह सोचते है की वह कार्य करने से लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे और इसलिए वे कोई निर्णय ले ही नहीं पाते एंव सोचते ही रह जाते है एंव समय उनके हाथ से पानी की तरह निकल जाता है| ऐसे लोग बाद में पछताते हैं| इसलिए दोस्तों ज्यादा मत सोचिये जो आपको सही लगे वह कीजिये क्योंकि शायद ही कोई ऐसा कार्य होगा जो सभी लोगों को एक साथ पसंद आये|
अपनी ख़ुशी को खुद नियंत्रण (control) कीजिये:- वर्तमान में ज्यादातर लोगों की खुशियाँ (Happiness) परिस्थितियों पर निर्भर हैं| ऐसे लोग अनुकूल परिस्थिति में खुश (Happy) एंव प्रतिकूल परिस्थियों में दुखी (Sad) हो जाते है| उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का कोई काम बन जाता है तो वह खुश (Happy) एंव काम न बनने पर वह दुखी हो जाता है| दोस्तों हर परिस्थिति में खुश रहें क्योंकि प्रयास करना हमारे हाथ में है लेकिन परिणाम अथवा परिस्थिति हमारे हाथ में नहीं है| परिस्थिति अनुकूल या प्रतिकूल कैसी भी हो सकती है लेकिन उसका response अच्छा ही होना चाहिए क्योंकि response करना हमारे हाथ में है|
आत्मनिर्भर बनें:- दोस्तों निर्भरता ही खुशियों की दुशमन है इसलिए जहाँ तक हो सके दूसरों से अपेक्षाओं कम करें, अपना कार्य स्वंय करें एंव स्वालंबन अपनाएं दूसरों के कर्मों या विचारों से दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि दूसरों के विचार या हमारे नियंत्रण में नहीं है|
“अगर आप उस बातों या परिस्थियों की वजह से दुखी हो जाते है जो आपके नियंत्रण में नहीं है तो इसका परिणाम समय की बर्बादी व भविष्य पछतावा है”
वर्तमान में जिएं (Live in Present):-

दोस्तों हमें दिन में 70,000 से 90000 विचार (thoughts) आते है और हमारी सफलता एंव असफलता इसी विचारों की quality (गुणवता) पर निर्भर करती हैं| वैज्ञानिकों के अनुसार ज्यादातर लोगों का 70% से 90% तक समय भूतकाल, भविष्यकाल एंव व्यर्थ की बातें सोचने में चला जाता है| भूतकाल हमें अनुभव देता है एंव भविष्यकाल के लिए हमें planning (योजना) करनी होती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम अपना सारा समय इसी में खर्च कर दें| दोस्तों हमें वर्तमान में ही रहना चाहिए और इसे best बनाना चाहिए क्योंकि न तो भूतकाल एंव न ही भविष्यकाल पर हमारा नियंत्रण है|
“अगर खुश रहना है एंव सफल होना है तो उस बारे में सोचना बंद कर दें जिस पर हमारा नियंत्रण न हो”
मेहनत एंव लगन (Hard work and Focus):-

दोस्तों किसी विद्वान् ने कहा है की कामयाबी, मेहनत से पहले केवल शब्दकोष में ही मिल सकती है| मेहनत (Hard Work) का अर्थ केवल शारीरिक काम से नहीं है, मेहनत शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार से हो सकती है| अनुभव यह कहता है की मानसिक मेहनत, शारीरिक मेहनत से ज्यादा मूल्यवान होती है|
कुछ लोग लक्ष्य (Target) तो बहुत बड़ा बना देते है लेकिन मेहनत नहीं करते और फिर अपने अपने लक्ष्य को बदलते रहते है| ऐसे लोग केवल योजना(planning) बनाते रह जाते है|
मेहनत व लगन से बड़े से बड़ा मुश्किल कार्य आसान हो जाता है| अगर लक्ष्य को प्राप्त करना है तो बीच में आने वाली बाधाओं को पार करना होगा, मेहनत करनी होगी, बार बार दृढ़ निश्चय से कोशिश करनी होगी|
“असफल लोगों के पास बचने का एकमात्र साधन यह होता है कि वे मुसीबत आने पर अपने लक्ष्य को बदल देते है|”
कुछ लोग ऐसे होते है जो मेहनत तो करते है लेकिन एक बार विफल होने पर निराश होकर कार्य को बीच में ही छोड़ देते है इसलिए मेहनत के साथ साथ लगन व दृढ़ निश्चय (Commitment) का होना भी अति आवश्यक है|
“अगर कोई व्यक्ति बार बार उस कार्य को करने पर भी सफल नहीं हो पा रहा तो इसका मतलब उसका कार्य करने का तरीका गलत है एंव उसे मानसिक मेहनत करने की आवश्यकता है|”
व्यवहारकुशलता:-

व्यवहारकुशल व्यक्ति जहाँ भी जाए वह वहां के वातावरण को खुशियों से भर देता है ऐसे लोगों को समाज सम्मान की दृष्टी से देखा जाता है| ऐसे लोग नम्रता व मुस्कराहट (Smile) के साथ व्यवहार करते है एंव हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते है| शिष्टाचार ही सबसे उत्तम सुन्दरता है जिसके बिना व्यक्ति केवल स्वयं तक सीमित हो जाता है एंव समाज उसे “स्वार्थी” नाम का अवार्ड देता है|
“जब आपके मित्रों की संख्या बढने लगे तो यह समझ लीजिये कि आप ने व्यवहारकुशलता का जादू सीख लिया है|”
शिष्टाचारी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र भी जाए वहा उनके मित्र बन जाते है जो उसके लिए जरुरत पड़ने पर मर मिटने के लिए तैयार रहते है|
चरित्र  व्यवहारकुशलता की नींव है एंव चरित्रहीन व्यक्ति कभी भी शिष्टाचारी नहीं बन सकता| चरित्र, व्यक्ति की परछाई होती है एंव समाज में व्यक्ति को चहरे से नहीं बल्कि चरित्र से पहचाना जाता है| चरित्र का निर्माण नैतिक मूल्यों, संस्कारों, शिक्षा एंव आदतों से होता है|
व्यवहारकुशल व्यक्तियों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है की वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहते है|
वर्तालाप दक्षता, व्यवहारकुशलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है| वाणी में वह शक्ति है जो वातावरण में मिठास घोल कर उसे खुशियों से भर सकती है या उसमे चिंगारी लगा कर आग भड़का सकती है|
“words can change the world” (शब्द संसार बदल सकते है|)
सोच समझ कर बोलना, कम शब्दों में ज्यादा बात कहना, व्यर्थ की बातें न करना, अच्छाई खोजना, तारीफ़ करना, दुसरे की बात को सुनना एंव महत्त्व देना, विनम्र रहना, गलतियाँ स्वीकारना इत्यादि वार्तालाप के कुछ basic नियम है|
इन पांच नियमों में इतनी शक्ति है कि ये आपकी लाइफ बदल देंगे (change your Life) और आपके सपनों को हकीकत में बदलने की शक्ति जगाएंगे| अंत में एक ही बात
“जरूरतमंद की मदद कीजिये क्योंकि क्या पता कल आपको किसी की मदद की जरुरत हो”

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मोदी की सफलता के राज ।


नरेन्द्र मोदी : अद्भुत व्यक्तित्व – Life of Narendra Modi 
नाम – नरेन्द्र दामोदरदास मोदी| जन्म – 17 सितम्बर 1950| वर्तमान में सबसे चर्चित व्यक्ति| नरेन्द्र मोदी वाकई में एक लीडर है और उनके सामने सारी मुसीबतें कमजोर पड़ जाती है| यह उनका व्यक्तित्व ही है जिसके कारण आज वह भारत के प्रधानमंत्री (Prime Minister ) है और विश्व की निगाहें उन पर टिकी हुयी है| नरेन्द्र मोदी भारत के ज्यादातर व्यक्तियों के आदर्श बन गए है और उनके व्यक्तित्व की खूबियों का परिक्षण करके हम भी अपने व्यक्तित्व को उत्तम बना सकते है क्योंकि यह हमारा व्यक्तित्व एंव चरित्र ही होता है जो हमें सफल बनाता है|
तो आईये जानते है कि क्या है नरेन्द्र मोदी की सफलता का राज़:-
Success Mantra of Narendra Modi

1.मेहनत (Hardwork):-
नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की सफलता का सबसे बड़ा राज यही है कि वह बहुत ज्यादा मेहनत करते है| चुनाव के समय वह केवल 3-4 घंटे ही सोते थे एंव प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वह 18 घंटे कार्य करते है| मेहनत से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है एंव सफलता के सारे रास्ते खुल जाते है| यह मोदी की मेहनत ही है जिसके कारण एक चाय बेचने वाला आज भारत का प्रधानमंत्री है|
2.आत्मविश्वास (self-confidence):-
Narendra Modi में गज़ब का आत्मविश्वास है| वह मुसीबतों से नहीं डरते और हमेशा प्रेरित एंव उत्साहित रहते है| आत्मविश्वास वहीँ होता है जहाँ किसी भी प्रकार का कोई “डर” नहीं होता|
3.सही समय पर सही निर्णय (Right Decision at Right Time):-
Modi की टाइमिंग गज़ब की है एंव वे प्रत्येक अपना प्रत्येक decision सही समय पर लेते है| Decision जितना महत्वपूर्ण होता है उसकी timing भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है| Narendra Modi ने शपथ समारोह में सभी देशों के प्रमुखों को बुलाकर सही टाइम पर सही decision लिया| मोदी ने हवाई वादे नहीं किये एंव उनकी सरकार के पहले बजट में भी इसी बात पर जोर दिया गया कि सबसे पहले अधूरी योजनाओं को पूरा किया जायेगा| मोदी निरंतर अपने सांसदों के साथ मीटिंग करते है एंव उन्हें ज्यादा से ज्यादा समय संसद में बिताने, काम पर ध्यान देने एंव फालतू बयानबाजी से बचने की सलाह देते है|
4.व्यवहारकुशलता एंव पहनावा :-
Modi की वाणी बुलंद है एंव उनके पास गज़ब की बोलने की कला है| Modi जब जनता के सामने बोलते है तो वे जनता की बात करते है और तेज आवाज से बोलते है एंव वे जब विदेशों के प्रमुखों के साथ बातचीत करते है तो बड़े आराम एंव शांतिपूर्ण तरीके के साथ बातचीत करते है|
Modi जहाँ भी जाते है वहां के हो जाते है| Modi जहाँ भी जाते है वहां की बात करते है, अगर वे राजस्थान जाते है तो राजस्थान की विशेषताओं की बात करते है एंव अगर वो नेपाल जाते है तो नेपाल की खूबसुरती की बात करते है| इसलिए उस क्षेत्र के लोगों को Modi अपने लगते है|
Modi अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देते है एंव इसीलिए आज वे स्टाइल आइकॉन बन गए है एंव मार्केट में उनके स्टाइल के कपड़ों की विशेष डिमांड है|
5.सकारात्मक एंव आशावादी (Positive Thinking):-
Modi सकारात्मक सोच रखते है एंव आशावादी बनने की सलाह देते है| वे एक motivational गुरु की तरह बात करते है एंव दूसरों को प्रेरित करते रहते है| वे कार्य को सकारात्मक रूप से शुरू करते है एंव उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा देते है| Modi आलोचनाओं की परवाह नहीं करते एंव आलोचनाओं को मुंह तोड़ जवाब देते है| वे जानते हैं कि अगर आलोचनाओं में दम नहीं है, तो वो आलोचना उनके लिए फायदेमंद हैं क्योंकि इससे बिना किसी खर्च के उनका प्रचार होता हैं|
6.रचनात्मक सोच (Creative Thinking):-
Modi रचनात्मक रूप से सोचते है (Creative thinking) एंव रचनात्मकता को बढ़ावा देते है| वे हमेशा समस्याओं का समाधान, creative ideas के द्वारा करते है| उन्होंनेhttp://www.mygov.nic.in website launch की ताकि वे जनता से सीधे जुड़ सकें एंव जनता के महत्वपूर्ण सुझाव उन्हें प्राप्त हो सके| Modi के चुनाव प्रचार का मुख्य साधन social media थी एंव यह उनकी creative thinking को दर्शाता है |
7.भारत की बात करते है (India First):-
Narendra Modi अपनी पार्टी से ज्यादा भारत (India First) की बात करते है जो उन्हें अन्य पार्टियों के नेताओं से अलग बनाता है| नरेन्द्र मोदी जानते है कि अगर भारत मजबूत हुआ तो उनकी पार्टी स्वत: मजबूत हो जाएगी, लेकिन अन्य पार्टियों ने इस बात को नहीं समझा और उन्हें इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ा| नरेन्द्र मोदी ने अपनी पार्टी को इस तरह से पेश किया है कि जनता के सामने उनसे अच्छा कोई विकल्प नहीं रहा |
 

8.परिवर्तन को अपनाते है :-
अगर इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी की तुलना करें तो उनमे सबसे बड़ा फर्क यह था कि कांग्रेस ने अपना वही पुराना तरीका अपनाया एंव जनता की भावनाओं को समझ नहीं सकी लेकिन मोदी यह समझ गए कि जनता विकास चाहती है न की धर्म की राजनीती इसलिए Narendra Modi ने अपनी किसी भी रैली में धर्म सम्बन्धी बात नहीं की|
9.सबको साथ लेकर चलते है :-

Modi का यह मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” (SABAKA SATH, SABAKA VIKAS) आज अमेरिका को भी पसंद आ रहा है| मोदी हमेशा से ही सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करते रहते है| हमेशा यह देखा गया है कि जब भी नयी सरकार बनती है तो मंत्री पद को लेकर हमेशा कोई न कोई मतभेद देखने को मिलते है लेकिन आज Modi की सरकार में आपस में कोई मतभेद नहीं है जबकि कुछ वर्षों पूर्व बीजेपी में ही एक साथ कई मतभेद देखने को मिलते थे| Modi की एक खास बात यह भी है की मतभेदों को बाहर आने से पूर्व ही वे उन्हें सुलझा देते है|
 10. अनुशासन (Discipline ) :-
Modi की जब से सरकार बनी है वे एक Professional CEO की तरह कार्य कर रहे है एंव अपने सांसदों की निरंतर class ले रहे है एंव उन्हें सख्त हिदायत दे रहे है कि सांसद, संसद की कार्यवाही में भाग ले एंव समय पर संसद पहुंचे| यह उनका अनुशासन ही था कि वे दिन में एक साथ 4-5 रैलियां करते थे एंव 18-20 घंटे मेहनत करते थे|
11. शारीरिक सक्षमता:-
मोदी एक फिट नेता है एंव वे इतनी ज्यादा मेहनत करने के बावजूद कभी भी थके हुए नहीं लगते| वे हमेशा आत्मविश्वास(Confidence) से भरे हुए रहते है एंव उनका energy level कभी कम नहीं होता|

​प्रथम विश्वयुद्ध और भारत

यह युद्ध आरम्‍भ हुआ था उस समय भारत औपनिवेशिक शासन के अधीन था। यह भारतीय सिपाही सम्‍पूर्ण विश्‍व में अलग-अलग लड़ाईयों में लड़े। भारत ने युद्ध के प्रयासों में जनशक्ति और सामग्री दोनों रूप से भरपूर योगदान किया। भारत के सिपाही फ्रांस और बेल्जियम , एडीन , अरब , पूर्वी अफ्रीका , गाली पोली , मिस्र ,मेसोपेाटामिया , फिलिस्‍तीन , पर्सिया और सालोनिका में बल्कि पूरे विश्‍व में विभिन्‍न लड़ाई के मैदानों में बड़े सम्‍मान के साथ लड़े। गढ़वाल राईफल्स रेजिमेन के दो सिपाहियो को संयुक्त राज्य का उच्चतम पदक विक्टोरिया क्रॉस भी मिला था।

युद्ध आरम्भ होने के पहले जर्मनों ने पूरी कोशिश की थी कि भारत में ब्रिटेन के विरुद्ध आन्दोलन शुरू किया जा सके। बहुत से लोगों का विचार था कि यदि ब्रिटेन युद्ध में लग गया तो भारत के क्रान्तिकारी इस अवसर का लाभ उठाकर देश से अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने में में सफल हो जाएंगे। किन्तु इसके उल्टा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं का मत था स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए इस समय ब्रिटेन की सहायता की जानी चाहिए। और जब ४ अगस्त को युद्ध आरम्भ हुआ तो ब्रिटेन भारत के नेताओं को अपने पक्ष में कर लिया। रियासतों के राजाओं ने इस युद्ध में दिल खोलकर ब्रिटेन की आर्थिक और सैनिक सहायता की।

कुल ८ लाख भारतीय सैनिक इस युद्ध में लड़े जिसमें कुल ४७७४६ सैनिक मारे गये और ६५००० जख्मी हुए। इस युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था लगभग दिवालिया हो गयी थी। भारत के बड़े नेताओं द्वारा इस युद्ध में ब्रिटेन को समर्थन ने ब्रिटिश चिन्तकों को भी चौंका दिया था। भारत के नेताओं को आशा थी कि युद्ध में ब्रिटेन के समर्थन से खुश होकर अंग्रेज भारत को इनाम के रूप में स्वतंत्रता दे देंगे या कम से कम स्वशासन का अधिकार देंगे किन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उलटे अंग्रेजों ने जलियाँवाला बाग नरसंहार जैसे घिनौने कृत्य से भारत के मुँह पर तमाचा मारा।

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jaliyawala Baagh 1919

दूसरा विश्व युद्ध १९३९ से १९४५ तक चलने वाला विश्व-स्तरीय युद्ध था। लगभग ७० देशों की थल-जल-वायु सेनाएँ इस युद्ध में सम्मलित थीं। इस युद्ध में विश्व दो भागों मे बँटा हुआ था – मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र। इस युद्ध के दौरान पूर्ण युद्ध का मनोभाव प्रचलन में आया क्योंकि इस युद्ध में लिप्त सारी महाशक्तियों ने अपनी आर्थिक, औद्योगिक तथा वैज्ञानिक क्षमता इस युद्ध में झोंक दी थी। इस युद्ध में विभिन्न राष्ट्रों के लगभग १० करोड़ सैनिकों ने हिस्सा लिया, तथा यह मानव इतिहास का सबसे ज़्यादा घातक युद्ध साबित हुआ। इस महायुद्ध में ५ से ७ करोड़ व्यक्तियों की जानें गईं क्योंकि इसके महत्वपूर्ण घटनाक्रम में असैनिक नागरिकों का नरसंहार- जिसमें होलोकॉस्ट भी शामिल है- तथा परमाणु हथियारों का एकमात्र इस्तेमाल शामिल है (जिसकी वजह से युद्ध के अंत मे मित्र राष्ट्रों की जीत हुई)। इसी कारण यह मानव इतिहास का सबसे भयंकर युद्ध था।[1]
हालांकि जापान चीन से सन् १९३७ ई. से युद्ध की अवस्था में था[2] किन्तु अमूमन दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत ०१ सितम्बर १९३९ में जानी जाती है जब जर्मनी ने पोलैंड पर हमला बोला और उसके बाद जब फ्रांस ने जर्मनी पर युद्ध की घोषणा कर दी तथा इंग्लैंड और अन्य राष्ट्रमंडल देशों ने भी इसका अनुमोदन किया।
जर्मनी ने १९३९ में यूरोप में एक बड़ा साम्राज्य बनाने के उद्देश्य से पोलैंड पर हमला बोल दिया। १९३९ के अंत से १९४१ की शुरुआत तक, अभियान तथा संधि की एक शृंखला में जर्मनी ने महाद्वीपीय यूरोप का बड़ा भाग या तो अपने अधीन कर लिया था या उसे जीत लिया था। नाट्सी-सोवियत समझौते के तहत सोवियत रूस अपने छः पड़ोसी मुल्कों, जिसमें पोलैंड भी शामिल था, पर क़ाबिज़ हो गया। फ़्रांस की हार के बाद युनाइटेड किंगडम और अन्य राष्ट्रमंडल देश ही धुरी राष्ट्रों से संघर्ष कर रहे थे, जिसमें उत्तरी अफ़्रीका की लड़ाइयाँ तथा लम्बी चली अटलांटिक की लड़ाई शामिल थे। जून १९४१ में युरोपीय धुरी राष्ट्रों ने सोवियत संघ पर हमला बोल दिया और इसने मानव इतिहास में ज़मीनी युद्ध के सबसे बड़े रणक्षेत्र को जन्म दिया। दिसंबर १९४१ को जापानी साम्राज्य भी धुरी राष्ट्रों की तरफ़ से इस युद्ध में कूद गया। दरअसल जापान का उद्देश्य पूर्वी एशिया तथा इंडोचायना में अपना प्रभुत्व स्थापित करने का था। उसने प्रशान्त महासागर में युरोपीय देशों के आधिपत्य वाले क्षेत्रों तथा संयुक्त राज्य अमेरीका के पर्ल हार्बर पर हमला बोल दिया और जल्द ही पश्चिमी प्रशान्त पर क़ब्ज़ा बना लिया।
सन् १९४२ में आगे बढ़ती धुरी सेना पर लगाम तब लगी जब पहले तो जापान सिलसिलेवार कई नौसैनिक झड़पें हारा, युरोपीय धुरी ताकतें उत्तरी अफ़्रीका में हारीं और निर्णायक मोड़ तब आया जब उनको स्तालिनग्राड में हार का मुँह देखना पड़ा। सन् १९४३ में जर्मनी पूर्वी युरोप में कई झड़पें हारा, इटली में मित्र राष्ट्रों ने आक्रमण बोल दिया तथा अमेरिका ने प्रशान्त महासागर में जीत दर्ज करनी शुरु कर दी जिसके कारणवश धुरी राष्ट्रों को सारे मोर्चों पर सामरिक दृश्टि से पीछे हटने की रणनीति अपनाने को मजबूर होना पड़ा। सन् १९४४ में जहाँ एक ओर पश्चिमी मित्र देशों ने जर्मनी द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़्रांस पर आक्रमण किया वहीं दूसरी ओर से सोवियत संघ ने अपनी खोई हुयी ज़मीन वापस छीनने के बाद जर्मनी तथा उसके सहयोगी राष्ट्रों पर हमला बोल दिया। सन् १९४५ के अप्रैल-मई में सोवियत और पोलैंड की सेनाओं ने बर्लिन पर क़ब्ज़ा कर लिया और युरोप में दूसरे विश्वयुद्ध का अन्त ८ मई १९४५ को तब हुआ जब जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया।
सन् १९४४ और १९४५ के दौरान अमेरिका ने कई जगहों पर जापानी नौसेना को शिकस्त दी और पश्चिमी प्रशान्त के कई द्वीपों में अपना क़ब्ज़ा बना लिया। जब जापानी द्वीपसमूह पर आक्रमण करने का समय क़रीब आया तो अमेरिका ने जापान में दो परमाणु बम गिरा दिये। १५ अगस्त १९४५ को एशिया में भी दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो गया जब जापानी साम्राज्य ने आत्मसमर्पण करना स्वीकार कर लिया।

पहले विश्वयुद्ध में हार के बाद जर्मनी को वर्साय की संधि पर जबरन हस्ताक्षर करना पड़ा। इस संधि के कारण उसे अपने कब्ज़े की बहुत सारी ज़मीन छोडनी पड़ी, किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं करने की शर्त माननी पड़ी, अपनी सेना को सीमित करना पड़ा और उसको पहले विश्व युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के रूप में दूसरे देशों को भुगतान करना पड़ा।

१९१७ में रूस में गृह युद्ध के बाद सोवियत संघ का निर्माण हुआ जो की जोसफ स्तालिन के शासन में था, १९२२ में उसी समय इटली में बेनितो मुसोलिनी का एकाधिपत्य राज्य कायम हुआ।

१९३३ में जर्मनी का शासक एडोल्फ हिटलर बना और तुंरत ही उसने जर्मनी को वापस एक शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में प्रर्दशित करना शुरू कर दिया। इस बात से फ्रांस और इंग्लैंड चिंतित हो गए जो की पिछली लड़ाई में काफ़ी नुक़सान उठा चुके थे। इटली भी इस बात से परेशान था क्योंकि उसे भी लगता था की जर्मनी उसके काम में दख़ल देगा क्योंकि उसका सपना भी शक्तिशाली सैन्य ताकत बनने का था।

इन सब बातों को देखकर और अपने आप को बचाने के लिए फ्रांस ने इटली के साथ हाथ मिलाया और उसने अफ्रीका में इथियोपिया- जो उसके कब्ज़े में था- को इटली को देने का मन बना लिया। १९३५ में बात और बिगड़ गई जब हिटलर ने वर्साय की संधि को तोड़ दिया और अपनी सेना को बड़ा करने का काम शुरू कर दिया।

जर्मनी को काबू में करने के लिए इंग्लैंड, फ्रांस और इटली ने स्ट्रेसा नामक शहर (जो इटली में है) में एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए जिसमें यह लिखा था की ऑस्ट्रिया की आज़ादी को कायम रखा जाए और जर्मनी को वर्साय की संधि तोड़ने से रोका जाए। लेकिन स्ट्रेसा घोषणा-पत्र ज्यादा सफल नहीं हुआ क्योंकि तीनों राज्यों के बीच में आम सहमती ज़्यादातर बातों पर नहीं बनी। उसी समय सोविएत संघ जो जर्मनी के पूर्वी यूरोप के बड़े हिस्से को कब्जा करने की मंशा से डरा हुआ था, फ्रांस से हाथ मिलाने को तैयार हो गया

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Indian army in world wars

जर्मन सेना १९३५ में नुरेम्बेर्ग में
१९३५ में इंग्लैंड ने वर्साय की संधि को दरकिनार करते हुए जर्मनी के साथ एक स्वतंत्र करार करके कुछ पुरानी शर्तों को कम कर दिया। १९३५ की अक्टूबर में इटली ने इथियोपिया पर आक्रमण कर दिया और सिर्फ़ जर्मनी ने इस आक्रमण को वैध माना जिसके कारण इटली ने जर्मनी को आस्ट्रिया पर कब्जा करने के मंशा को हरी झंडी दे दी। १९३६ में जब हिटलर ने रयानलैंड को दोबारा अपनी सेना का गड बाने की कोशिश की तो उस पर ज्यादा आपत्तियां नही उठाई गई . उसी साल स्पेन में ग्रह युद्ध चालू हुआ तो जर्मनी और इटली ने वहां की राष्ट्रवादी ताकत का समर्थन किया जो सोविएत संघ की सहायता वाली स्पेनिश गणराज्य के खिलाफ थी। नए हथियारों के परिक्षण के बीच में राष्ट्रवादी ताकतों ने 1939 में युद्ध जीत लिया .

जैसे जैसे समय बीतता गया तनाव बढता रहा और अपने आप को ताकतवर करने की कोशिशें बढती गई। तभी जर्मनी और इटली ने रोम-बर्लिन समझौता अंग्रेज़ी: (ROME – BERLIN AXIS) किया और फिर जर्मनी ने जापान के साथ मिलकर साम्यवाद विरोधि करार अंग्रेज़ी: (anti comintern pact) किया जो चीन और सोविएत संघ के खिलाफ मिलकर काम करने के लिये था और इटली भी इसमे १९४० में शामिल हो गया।

1937 में चीन और जापान मार्को पोलों में आपस में लड़ रहे थे। उसी के बाद जापान ने चीन पर पर पूरी तरह से धावा बोल दिया। सोविएत संघ ने चीन तो अपना पूरा समर्थन दिया. लेकिन जापान सेना ने शंघाई से चीन की सेना को हराने शुरू किया और उनकी राजधानी बेजिंग पर कब्जा कर लिया। 1938 ने चीन ने अपनी पीली नदी तो बाड़ ग्रस्त कर दिया और चीन को थोड़ा समय मिल गया सँभालने ने का लेकिन फिर भी वो जापान को रोक नही पाये। इसे बीच सोविएत संघ और जापान के बीच में छोटा युध हुआ पर वो लोग अपनी सीमा पर ज्यादा व्यस्त हो गए।

यूरोप में जर्मनी और इटली और ताकतवर होते जा रहे थे और 1938 में जर्मनी ने आस्ट्रिया पर हमला बोल दिया फिर भी दुसरे यूरोपीय देशों ने इसका ज़्यादा विरोध नही किया। इस बात से उत्साहित होकर हिटलर ने सदेतेनलैंड जो की चेकोस्लोवाकिया का पश्चिमी हिस्सा है और जहाँ जर्मन भाषा बोलने वालों की ज्यादा तादात थी वहां पर हमला बोल दिया। फ्रांस और इंग्लैंड ने इस बात को हलके से लिया और जर्मनी से कहाँ की जर्मनी उनसे वादा करे की वो अब कहीं और हमला नही करेगा। लेकिन जर्मनी ने इस वादे को नही निभाया और उसने हंगरी से साथ मिलकर 1939 में पूरे चेकोस्लोवाकिया पर कब्जा कर लिया।

दंजिग शहर जो की पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी से अलग करके पोलैंड को दे दिया गया था और इसका संचालन देशों का संघ (अंग्रेज़ी: league of nations) (लीग ऑफ़ नेशन्स) नामक विश्वस्तरीय संस्था कर रही थी, जो की प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुए थी। इस देंजिंग शहर पर जब हिटलर ने कब्जा करने की सोची तो फ्रांस और जर्मनी पोलैंड को अपनी आजादी के लिए समर्थन देने को तैयार हो गए। और जब इटली ने अल्बानिया पर हमला बोला तो यही समर्थन रोमानिया और ग्रीस को भी दिया गया। सोविएत संघ ने भी फ्रांस और इंग्लैंड के साथ हाथ मिलाने की कोशिश की लेकिन पश्चिमी देशों ने उसका साथ लेने से इंकार कर दिया क्योंकि उनको सोविएत संघ की मंशा और उसकी क्षमता पर शक था। फ्रांस और इंग्लैंड की पोलैंड को सहायता के बाद इटली और जर्मनी ने भी समझौता पैक्ट ऑफ़ स्टील किया की वो पूरी तरह एक दूसरे के साथ है।

सोविएत संघ यह समझ गया था की फ्रांस और इंग्लैंड को उसका साथ पसंद नही और जर्मनी अगर उस पर हमला करेगा तो भी फ्रांस और इंग्लैंड उस के साथ नही होंगे तो उसने जर्मनी के साथ मिलकर उसपर आक्रमण न करने का समझौता (नॉन अग्ग्रेग्र्सन पैक्ट) पर हस्ताक्षर किए और खुफिया तौर पर पोलैंड और बाकि पूर्वी यूरोप को आपस में बाटने का ही करार शामिल था।

सितम्बर 1939 में सोविएत संघ ने जापान को अपनी सीमा से खदेड़ दिया और उसी समय जर्मनी ने पोलैंड पर हमला बोल दिया। फ्रांस, इंग्लैंड और राष्ट्रमण्डल देशों ने भी जर्मनी के खिलाफ हमला बोल दिया परन्तु यह हमला बहुत बड़े पैमाने पर नही था सिर्फ़ फ्रांस ने एक छोटा हमला सारलैण्ड पर किया जो की जर्मनी का एक राज्य था। सोविएत संघ के जापान के साथ युद्धविराम के घोषणा के बाद ख़ुद ही पोलैंड पर हमला बोल दिया। अक्टूबर 1939 तक पोलैंड जर्मनी और सोविएत संघ के बीच विभाजित हो चुका था। इसी दौरान जापान ने चीन के एक महत्वपूर्ण शहर चंघसा पर आक्रमण कर दिया पर चीन ने उन्हें बहार खड़ेड दिया। पोलैंड पर हमले के बाद सोविएत संघ ने अपनी सेना को बाल्टिक देशों (लातविया, एस्टोनिया, लिथुँनिया) की तरफ मोड़ दी। नवम्बर 1939 में फिनलैंड पर जब सोविएत संघ ने हमला बोला तो युद्ध जो विंटर वार के नाम से जाना जाता है वो चार महीने चला और फिनलैंड को अपनी थोडी सी जमीन खोनी पड़ी और उसने सोविएत संघ के साथ मॉस्को शान्ति करार पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत उसकी आज़ादी को नही छीना जाएगा पर उस सोविएत संघ के कब्जे वाली फिनलैंड की ज़मीन को छोड़ना पड़ेगा जिसमे फिनलैंड की 12 प्रतिशत जन्शंख्या रहती थी और उसका दूसरा बड़ा शहर य्वोर्ग शामिल था।

फ्रांस और इंग्लैंड ने सोविएत संघ के फिनलैंड पर हमले को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल होने का बहाना बनाया और जर्मनी के साथ मिल गए और सोविएत संघ को देशों के संघ (लीग ऑफ़ नेशन्स) से बहार करने की कोशिश की। चीन के पास कोशिश को रोकने का मौक था क्योकि वो देशों के संघ (लीग ऑफ़ नेशन्स) का सदस्य था। लेकिन वो इस प्रस्ताव में शामिल नही हुआ क्योंकि न तो वो सोविएत संघ से और न ही पश्चिमी ताकतों से अपने आप को दूर रखना चाहता था। सोविएत संघ इस बात से नाराज़ हो गया और चीन को मिलने वाली सारी सैनिक मदद को रोक दिया। जून 1940 में सोविएत संघ ने तीनों बाल्टिक देशों पर कब्जा कर लिया।

Is our india really changing

1. Wheels of Empowerment

To ensure that women travel safe after dark, the Kerala government has launched a popular initiative — She Taxis, a unique cab service for women and by women.

2. Padmini Prakash (31) from Coimbatore, becomes the first ever transgender NEWS anchor in India! 

Grew up in RS Puram in Coimbatore, was a first-year BCom student when she cut off all ties with her family and dropped out of college because she could no longer take the stigma and pressure.

She travelled across the state and beyond and later returned to Tamil Nadu and became a Bharathanatyam dance instructor. Padmini, who now stays with her partner in Vellakinar in the suburbs of Coimbatore, also participated in and won several transgender beauty contests.

3. Sangita Awhale, a woman from Saikheda village in Washim district, sold her mangalasutra to build toilet in village.

 “Toilet is a basic necessity, compared to ornaments. I sold my ornaments and decided to build the toilet,” Sangita told reporters at Munde’s office here.

Her feat earned admiration from not only her family but the villagers, and as the news spread through local media, from people across Maharashtra. For, ‘mangalsutra’ is not a mere chain and a pendant, but dearest to a married Maharashtrian woman as it symbolizes her wedlock.

4. Prithika Yashini,India’s first Transgender Sub-inspector is among 21 sub-inspectors to receive orders from Salem police commissioner, Sumit Charan, to join the region’s local service.

Initially, her application had been turned down because the Tamil Nadu Uniformed Services Recruitment Board did not recognize transgender people.

After a long legal battle, the Madras High Court ordered the board to recognize the 25-year-old as a third gender and process her application.

5. I recently came across a news report on Eco-Feminism

In India’s north-western state Rajasthan now parents are turning on their backs on female foeticide which was once deeply rooted in the cultural tradition. This is a novel solution that the elderly people has come up with, the parents now celebrate the birth of the girl child by planting a fruit tree to secure the future of every female child. 

They believe the fruit and trees can be sold later, generating income for the girl’s education and marriage.

6. Indeed politics is also changing.We did not have hope from politicians in the past but she is showing hope amidst darkness.Responding to a tweet,

Sushma Swaraj helps a son perform his father’s last rites by getting the embassy opened on a holiday.

7. A Malayali Muslim bride demanded 50 books as part of a custom in Muslim weddings, only that the custom has mostly seen woman’s family demanding gold or money.

Nechiyil decided to demand 50 books from her fiancé as mehr, a mandatory payment in the form of money or possessions paid or promised to be paid by the groom to the bride at the time of marriage. She asked for books as mehr because of two reasons. “One, because according to the religious texts, a girl can demand anything she wants and the groom cannot disagree. And second, because I wanted to show the Malappuram Muslims that a wedding can take place without obsessing over the amount of gold transacted between both parties,” she said.

Some of the honorable mentions from our true citizens : 

But then we have examples like these which makes us think is this change a positive one or negative. Salman Khan got acquitted in a hit and run case. #twitter is going berserk. I am not only sad about the verdict but also about the time it took just to ascertain that he was not guilty. 13 years, seriously, 13 years. Is it a joke? Are you kidding me?

And not only this, the former telecom minister A. Raja also got bail and don’t know when he would face the same – “Acquittal”.

I think change is in our hands and its up to us how we can mold it for a better future. But the most important thing of all is to open our minds and be optimistic.

Jai Hind !!