​ताजमहेल का सच जानकर उड जाएगे आपके होश! ताजमहेल- मंदिर या मकब्रा

आगरा के ताजमहल का सच सम्पूर्ण विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने वाले श्री पी.एन. ओक अपनी पुस्तक “Tajmahal is a Hindu Temple Palace” और “Taj Mahal: The True Story” में 100 से भी अधिक प्रमाण और तर्को का हवाला देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजोमहालय है। श्री पी.एन. ओक साहब को उस इतिहासकार के रूप मे जाना जाता है जो भारत के विकृत इतिहास को पुर्नोत्‍थान और सही दिशा में ले जाने का काम किया है।


मुगलो और अग्रेजो के समय मे जिस प्रकार भारत के इतिहास के साथ जिस प्रकार छेड़छाड की गई और आज वर्तमान तक मे की जा रही है, उसका विरोध और सही प्रस्तुतिकारण करने वाले प्रमुख इतिहासकारो में पुरूषोत्तम नाथ ओक (Historian Purushottam Nath Oak) साहब का नाम लिया जाता है। ओक साहब ने ताजमहल की भूमिका, इतिहास और पृष्‍ठभूमि से लेकर सभी का अध्‍ययन किया और छायाचित्रों छाया चित्रो के द्वारा उसे प्रमाणित करने का सार्थक प्रयास किया।


श्री ओक के इन तथ्‍यो पर आज सरकार और प्रमुख विश्वविद्यालय आदि मौन जबकि इस विषय पर शोध किया जाना चाहिये और सही इतिहास से देश और समाज को अवगत कराना चाहिये। किन्‍तु दुःख की बात तो यह है कि आज तक उनकी किसी भी प्रकार से अधिकारिक जाँच नहीं हुई। यदि ताजमहल के शिव मंदिर होने में सच्चाई है तो भारतीयता के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। आज भी हम जैसे विद्यार्थियों को झूठे इतिहास की शिक्षा देना स्वयं शिक्षा के लिये अपमान की बात है, क्‍योकि जिस इतिहास से हम सबक सीखने की बात कहते है यदि वह ही गलत हो, इससे बड़ा राष्‍ट्रीय शर्म और क्‍या हो सकता है ? आखिर क्यों ताजमहल की असलियत को देश से छिपाया जा रहा है? इतने मजबूत तथ्यों और तर्कों के बाद भी ताजमहल के सही इतिहास से देश को क्यों वंचित रखा जा रहा है?


प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी विसंगतियों को इंगित करते हैं जो शिव मंदिर के पक्ष में विश्वास का समर्थन करते हैं। प्रो. ओक के अनुसार ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है और आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं, जो आम जनता की पहुँच से दूर हैं। प्रो. ओक. ने यह भी जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं। ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद-बूँद कर पानी टपकता रहता है, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी भी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता, जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद-बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है, फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब? इस बात का तोड़ आज तक नहीं खोजा जा सका है।

 

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